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पंजाब

शिरोमणी अकाली दल ने विधानसभा स्पीकर से पूरे राज्य को एक प्रमुख मंडी बनाने के लिए इमरजेंसी सैशन बुलाने को कहा

October 13, 2020 06:46 PM

चंडीगढ़/13अक्टूबर: शिरोमणी अकाली दल के विधायक विंग ने विधानसभा अध्यक्ष राणा के पी सिंह से कहा है कि वे पूरे राज्य को एक मार्केटिंग यार्ड बनाने के लिए नए कानून बनाने के लिए इमरजेंसी सत्र बुलाएं और साथ ही 2017 के संशोधित एपीएमसी अधिनियम को रदद कर दें और तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को पंजाब में लागू नही किया जाना चाहिए।

विधायक दल के नेता सरदार शरनजीत सिंह ढ़िल्लों के नेतृत्व में अकाली दल की लेजिस्लेटिव विंग के सदस्यों ने भी स्पीकर के इस बात पर प्रभावित होकर कहा कि ऐसा करना संघवाद के मूल सिद्धांत के अनुरूप होगा। अध्यक्ष को दिए गए प्रत्यावेदन में उन्होने स्पष्ट किया कि नए कृषि कानून संघीय ढ़ांचे पर हमला है और विधानसभा को राज्य की शक्तियों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बांध की तरह काम करना चाहिए। अकाली दल विधायकों ने स्पीकर से कहा कि हम चुपचाप नही रह सकते क्योंकि राज्य की शक्तियां तेजी से कमजोर हो रही हैं।

पंजाब और पंजाबियों के अस्तित्व के संकट का सामना करते हुए सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया और सरदार गुरप्रताप सिंह वडाला सहित विधायकों ने स्पीकार से कहा कि ‘अन्नदाता को पूरी तरह बर्बाद होने से बचाने का अभी भी समय है’। उन्होनेे कहा कि पंजाब के किसानों को केंद्रीय कृषि बनाकर ऐसा किया जा सकता है। उन्होने यह भी बताया कि किस तरह शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने करीब दो सप्ताह पहले ही पूरे राज्य को एक मंडी( प्रिसिंपल मार्केटिंग यार्ड बनाने के कानून लाने का सुझाव दिया था लेकिन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मुददे पर फ्लिप फ्लॉप खेल रहे थे और राज्य के किसानों को कमजोर कर रहे थे।

राज्य में उभरते कृषि संकट का ब्यौरा देते हुए कहा गया है कि तीन कृषि अधिनियमों के लागू होने से पूरे कृषि क्षेत्र के साथ साथ राज्य की अर्थव्यवस्था भी खतरे में पड़ गई है। उन्होने कहा कि यह अधिनियम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एपीएमसी) व्यवस्था को समाप्त करने के साथ साथ सुनिश्चित सरकारी खरीद को समाप्त करने के लिए तैयार किए गए थे। उन्होने कहा कि इस प्रक्रिया में वे खेत मजदूर के साथ साथ मंडी मजदूरों, आढ़तियों के लिए भी खतरनाक होंगे तथा इसका परिणाम भी खतरनाक हो सकता है।

शिरोमणी अकाली दल की भूमिका के बारे में बोलते हुए प्रतिनिधियों ने कहा कि वे केंद्रीय मंत्रालय में पार्टी के प्रतिनिधि हैं- सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने मंत्रिमंडल में अध्यादेशों पर आपत्ति जताई और पार्टी ने किसान समुदाय की इच्छाओं को ख्याल में रखकर बदलाव करवाने की कोशिश की। इसमें कहा गया है कि जब भाजपा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को सवैंधानिक कानून बनाने के लिए बदलाव करने से इंकार कर दिया यां किसानों का आश्वस्त किया कि खाद्यान्न और किसान उपज की खरीद को न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे नही खरीदने दिया जाएगा तो अकाली दल ने विधेयकों के खिलाफ मतदान किया और बाद में एनडीए सरकार से समर्थन वापिस ले लिया।

विधायकों ने कहा कि इसके विपरीत पंजाब में कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकार ने इस मुददे पर दोहरे मापदंड अपनाए हैं। ‘ इससे न केवल एपीएमसी अधिनियम में संशोधन किया क्योंकि उन्होने 2017 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्राईवेट बाजार गज बनाने और ई- ट्रेडिंग की अनुमति देने की घोषणा की थी बल्कि इस उददेश्य के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के सदस्य के रूप में एक ही खंड वाले केंद्रय कृषि अध्यादेशों का तैयार करने का समर्थन दिया था। कांग्रेस सरकार ने किसानों को एक साल तक केंद्र के साथ कृषि अध्यादेशों की तुलना में किए जा रहे विचार विमर्श के बारे अंधेरे में रखा, यहां तक कि वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल को उच्चाधिकार समिति की मीटिंग में भाग लेने के लिए भेजा गया था। विधायकों ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 28 अगस्त को ससंद और केंद्र को पारित तत्कालीन कृषि विधेयकों को खारिज करने वाले प्रस्ताव को आगे न भेजकर विधानसभा की निष्पक्ष छवि को भी कंलकित किया है।

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